बुग्ज व हसद की बुराइयाँ
*🇮🇳"सिराते मुस्तक़ीम*
*📖कोशिश इल्म आम करने की✒*
*🔥बुग्ज व हसद की बुराइयाँ✨*
पोस्ट नम्बर-::1⃣
बुग्ज व हसद इंसान के अन्दर ऐसा बुरा वस्फ है जिस से दोनों जहान की भलाईयाँ रुक जाती हैं,
और वह दुनिया व आखिरत में जलील व ख्वार हो जाता है, मोमिन आपस में एक दूसरे के भाई हैं इसलिए आपस में मिल जुल कर रहना चाहिए। बुग्ज व हसद से दूसरे का नुक्सान तो कुछ न होगा अल्बत्ता वह खुद नुक्सान व गुनाह में मुब्तला होगा।
🔥हसद जहन्नम में ले जाता है रब्बुल-इज़्जत तबारक व तआला ने हज़रत आदम अला नबीयेना
अलैहिस्सलातु वस्सलाम को यह रुतबा दिया कि तमाम मलाइका से सज्दा कराया शैतान ने हसद
किया वह जहन्नम में गया, दुनिया में अगर किसी को अपने से ज्यादा देखे शुक्र बजा लाए कि मुझे इतना मुब्तला न किया और दीन में देखे तो उसकी दस्त बोसी करे, उसे माने, किसी पर हसद करना रब्बुल-इज़्ज़त पर एतराज़ है कि उसे क्यों ज़्यादा दिया और मुझे क्यों कम रखा।
*✨ईमान और हसद🔥*
नेकियों से ईमान मज्बूत व कवी होता है और हसद ईमान को कमजोर व तबाह कर देता है यह
दोनों मुतजाद वस्फ हैं इसलिए यह दोनों एक साथ बन्द-ए-मोमिन में जमा नहीं होते।
📖हदीस में है *मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते* हैं बन्द-ए-मोमिन के दिल में ईमान व हसद दोनों एक साथ जमा नहीं होंगे।
*(📚फैजाने आला हजरत)*
✨〰✨〰✨〰✨
*📲9711933871*
*🇮🇳"सिराते मुस्तक़ीम*
*📖कोशिश इल्म आम करने की✒*
*🔥बुग्ज व हसद की बुराइयाँ✨*
पोस्ट नम्बर-::2⃣
*🔥हसद की आग में नेकियों का जलना✨*
हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम फरमाते हैं : हसद से बचो क्यों कि हसद
नेकियों को इस तरह खाता है जिस तरह आग लकड़ी को या घास को खाती है।
*एक रिवायत में है कि हसद नेकियों को खा जाता है जैसे आग लकड़ी को।*
एक और हदीस में है कि हसद ईमान को तबाह व बरबाद कर देता है जिस तरह इल्वा शहद
को। इल्वा एक दरख़्त का रस है जो सख्त कड़वा होता है।
🔥हसद यह है कि आदमी दूसरे की नेमत के जवाल का ख्वाहां हो कि यह नेमत उस से छिन जाए और मुझे मिल जाए।
🌸रश्क यह है कि आदमी दूसरे की नेमत व तरक्की देख कर यह ख्वाहिश करे कि यह नेमत
उसके पास भी रहे और मुझे भी मिले।
उलमा फरमाते हैं कि रश्क करना जाइज है और हसद करन हराम है बल्कि हसद करने में
अपना ही नुक्सान है।
*(📚फैजाने आला हजरत सपह,190)*
✨〰✨〰✨➖✨
*📲9711933871*
*🇮🇳"सिराते मुस्तक़ीम*
*📖कोशिश इल्म आम करने की✒*
*🔥बुग्ज व हसद की बुराइयाँ✨*
पोस्ट नम्बर-::3⃣
*🌸मुसलमान से बुग्ज रखना हराम है🔥।*
मुसलमान से बिला वजहे शरई कीना व बुग्ज रखना हराम है और बिला मस्लेहते शरईया तीन
दिन से ज़्यादा सलाम व कलाम का तर्क भी हराम है।
💫रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम फरमाते हैं आपस में बग्ज व हसद न करो, एक दूसरे को पीठ न दो तुम तो अल्लाह के बन्दे हो भाई भाई हो जाओ।
📖दूसरी हदीस में है मुसलमान का अपने भाई को तीन दिन से ज्यादा तक छोड़े रहना, उन से
सलाम व कलाम न करना हलाल नहीं है।
*(📚फैजाने आला हजरत सपह,191)*
✨〰✨〰✨〰✨
*📲9711933871*
*🇮🇳"सिराते मुस्तक़ीम*
*📖कोशिश इल्म आम करने की✒*
*🔥बुग्ज व हसद की बुराइयाँ✨*
पोस्ट नम्बर-::4⃣
*✒आला हज़रत का हसद से गुरेज़*
मोमिन की शान यह है कि किसी दूसरे मोमिन को उसकी ज़बान और हाथ से कोई तकलीफ व
ईजा न पहुँचे बल्कि उसकी ज़िन्दगी अच्छाईयों का मजमूआ और दूसरों के लिए एक पाकीज़ा नमूना न मुआशरा का हर फर्द अगर इन बातों का आमिल व पाबन्द हो जाए तो वह मुआशरा इस्लामी और अस्लाफ की यादगार हो जाए।
🌸आला हज़रत इमाम अहमद रजा बरैलवी कुदेसा सिर्रहू खुद अपने मुतअल्लिक एक मकाम पर बतौर तशक्कुर व तहदीसे नेमत के तहरीर फरमाते हैं :
⚜ फकीर में लाखों उयूब हैं मगर बिहम्दिलिल्लाह तआला मेरे रब ने मुझे हसद से बिल्कुल पाक
रखा है। अपने से जिसे ज़्यादा पाया अगर दुनिया के माल व मनाल में ज्यादा है, कल्ब ने उसे अन्दर से हकीर जाना, फिर हसद किया हिकारत पर? और अगर दीनी शरफ व अफ्जाल में ज्यादा है,
उसकी दस्त बोसी व कदमबोसी को अपना फख्र जाना, फिर हसद किया अपने मुअज्जम बा बरकत
पर? अपने में जिसे हिमायते दीन में देखा उसके नथ फज़ाइल और खुल्क को उसकी तरफ माइल
करने में तहरीर व तीर से कोशां रहा उसके लिए उम्दा अल्काब वज़ करके शाए किए, जिस
पर मेरी किताब 'अल-मोअतमद अल-मुस्तनद" वगैरह शाहिद हैं। हसद शोहरत तलबी से पैदा
होता है और मेरे रब्बे करीम के वज्हे करीम के लिए हम्द है कि मैंने कभी उसके लिए ख्वाहिश न की बल्कि हमेशा उस से नफूर व गोशा नशीनी का दिल्दादा रहा
*(📚फैजाने आला हजरत सपह,191)*
*➡ उन्वान खत्म✅*
✨〰✨〰✨〰✨
*📲9711933871*
Comments
Post a Comment